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Samas - Word Formation(hindi) (2)

शब्द निमार्ण (उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास)

समास(SamAs)
दो या दो से अधिक पदों (शब्द) के परस्पर मेल को समास कहते हैं । इसके छः भेद हैं ।
1. तत्पुरुष समास - जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं । जैसे -
समस्त पद विग्रह
राजमहल – राजा का महल
रसोईघर – रसोई का लिए घर
तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
यज्ञशाला – यज्ञ की शाला
रोगमुक्त – रोग से मुक्त
देश – भक्त – देश का भक्त
पवनपुत्र – पवन का पुत्र
दीनानाथ – दीनों का नाथ
वनवास – वन में वास
प्रेमसागर – प्रेम का सागर
2. कर्मधारय समास - जिन दो पदों में पहला पद दूसरे का विशेषण होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं । जैसे -
समस्त पद विग्रह
श्याममेघ – श्याम रुपी मेघ
चंद्रमुख – चंद्र के समान मुख
कृष्णसर्प – कृष्ण है जो सर्प
नीलगगन – नीला है जो गगन
नीलांबर – नीला है जो अंबर
सद्धर्म – सत् है जो धर्म
लालटोपी – लाल है जो टोपी
3. द्विगु समास - जिन दो पदों में पहला पद संख्यावाचक होता है । जैसे -
समस्त पद विग्रह समस्त पद विग्रह
चौराहा – चार राहों का समूह तिराहा – तीन राहों का समूह
षट्कोण – छः कोणों का समूह पंचवटी – पाँच वटों का समूह
तिरंगा – तीन रंगों का समूह सप्ताह – सात दिनों का समूह
नवरत्न – नौ रत्नों का समूह त्रिलोक – तीन लोकों का समूह
शताब्दी – सौ अब्दों का समूह चवन्नी – चार आनों का समूह
4. द्वंद्व समास - जब अर्थ की दृष्टि से दोनों ही पदों का समान महत्व होता है । जैसे -
समस्त पद विग्रह समस्त पद विग्रह
दिन-रात – दिन और रात गुरू-शिष्य – गुरू और शिष्य
चल-अचल – चल और अचल पाप-पुण्य – पाप और पुण्य
माता-पिता – माता और पिता ऊँच-नीच – ऊँच और नीच
सुख-दुख – सुख और दुख लव-कुश – लव और कुश
5. बहुव्रीहि समास - जिन दो पदों में कोई भी पद प्रधान न हो बल्कि कोई अन्य पद प्रधान हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं । इसमें विग्रह करते समय ‘वाला’, ‘वाली’ या ‘जिसका’, ‘जिसके’ शब्दों का प्रयोग होता है । जैसे -
समस्त पद विग्रह
दशानन – दस आनन हैं जिसके
कमलनयन – कमल के समान नयन वाला
चतुर्भुज – चार भुजाओं वाला (विष्णु)
दिगंबर – दिशाएँ हैं अंबर (वस्त्र) जिसके
हँसमुख – हँसता हुआ है मुख जिसका
चंद्रमुखी – चंद्र के समान मुख वाली
गिरिधर – गिरि को धारण करने वाला (कृष्ण)
चतुर्मुख – चार मुखों वाला (ब्रह्मा)
पंचानन – पाँच आनन वाला (शिव)
त्रिलोचन – तीन हैं लोचन जिसके (शिव)
बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि कोई अन्य पद ही प्रधान होता है, पर कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है या एक पद उपमान और दूसरा पद उपमेय होता है । जैसे -
पीतांबर – पीला अंबर कर्मधारय समास
- पीला है अंबर जिसका (कृष्ण) बहुव्रीहि समास
कमलनयन – कमल के समान नयन कर्मधारय
- कमल के समान नयनों वाला (कृष्ण) बहुव्रीहि
6. अव्ययीभाव समास - जिस समास में पहला पद प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं । इसमें पहला पद अव्यय होता है । जैसे -
समस्त पद विग्रह
प्रतिदिन हर दिन
बेकसूर बिना कसूर
बाकायदा कायदे के अनुसार
आमरण मरने तक़
भरपेट पेट भर के
यथाशक्ति शक्ति के अनुसार
यथाशीघ्र जितना शिघ्र हो सके
नोट – एक समान शब्दों की आवृत्ति वाले शब्द भी अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आते हैं । जैसे – घर-घर – प्रत्येक घर
दिनोंदिन – दिन प्रतिदिन
याद रखें – समस्त पद के विग्रह के अनुसार ही समास का नाम होगा ।
कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा विशेष्य या एक पद उपमान और दूसरा उपमेय होता है पर द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है । जैसे -
महात्मा – महान आत्मा कर्मधारय समास
नीलगगन – नीला गगन कर्मधारय समास
त्रिवेणी – तीन वेणियाँ द्विगु समास
सप्ताह – सात दिनों का समूह द्विगु समास