नदियां, बहकर आती नदियां, हेल मेलती, खेल खेलती नदियां। सागर, उनसे बना है सागर । विस्तीर्ण, प्रगाढ़, नीला लहरीला सागर। सुनो सागर ! ओ सागर ! मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। आओ, सहज ही लिपट जाओ मुझसे अपने नेह के भुजबल में आलिंगनबद्ध कर लो। श्यामल सागर ! मोती ओर मूंगे के कानों वाले ओ सागर, मछली की तड़प लेकर आया हूँ लौटा न देना। सागर, खामोश सागर ! उदास सागर ! नदियां, बोलती हैं नदियां, कहाँ है सागर ? कौन कहे, कहाँ है सागर !
O sAgar _ ओ सागर
O sAgar! mai tumsE _ ओ सागर !
मैं तुमसे
Poetry on Ocean (sAgar)::सागर पर कविता
नदियां,
बहकर आती नदियां,
हेल मेलती, खेल खेलती
नदियां।
सागर,…Read More
sAgar dAdA_सागर दादा
sAgar dAdA_सागर दादा
Poetry on Ocean (sAgar)::सागर पर कविता
सागर दादा, सागर दादा,
नदियों झीलों के परदादा।
तुम नदियों को पास बुलाते,
ल…Read More
sAgar kI lahar mE_सागर की लहर में
sAgar kI lahar mE_सागर की लहर में
Poetry on Ocean (sAgar)::सागर पर कविता
सागर की लहर लहर में
है हास स्वर्ण किरणों का,
सागर के अंतस्…Read More
sAgar mughE apnE_सागर मुझे अपने
sAgar mughE apnE_सागर मुझे अपने
Poetry on Ocean (sAgar)::सागर पर कविता
सागर मुझे अपने
सीने पर बिठाये रखता है
अपनी लहरों के फन पर
उसने खुद…Read More